Ānandalaharī: jisameṃ śrīsaccidānanda parabrahma śrīrāmacandrajī kā guṇānuvāda ativa lalita bhajanoṃ meṃ varṇita hai — Lakhanaū: Navalakiśora, 1914

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रा
ओीसचिदानन्द परब्रह्म श्रीरामचन्द्रजी का
:.. गुणखानुबाद झतीव ललित भजनाों.. .
| जिसके
बढ़ने व सुनने से अकथर्नाय

आनन्द दोताएँ ॥
डद्वितीयबार दि

हर लखनऊ
.. शुपरिटिडंट बादू मनोहरखाल भागेव वी. ए-, कै श्रवन्थ से
मुंशी नचलकिंशोर सी. आई. ई-, के छापखाने
:....... में छुपी अपेल सन्‌ १९१४ ई० ॥ 2
< 5९ धन कद यो: दर या किरदार .
पुब्तेक कप इक तसनीफ मददफुज़ हैं बह इस लापेखाने के ॥ हा

कर के 2 मिली छठ ..



हु


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