Siṃha, Śrīdhara [HerausgeberIn] [Editor]
Adbhuta carcā — Lakhanaū, 1949

Page: 92
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९२ अद्‌भुत चर्चा
कुँवर - मज़े से दो-चार दिन जल्से देखेगे, नैनीताल में
यह मज़े कहाँ मिलते । व्यासजी, अब तो यों नहीं बैठा जाता ।
देखिए आपके भंडार में कुछ है, दो-चार बोतल निकालिए,
कुछ रंग जमे ।
८ - रेशम क कीड़े
मेरे बग़ीचे में शहतूत के कुछ पुराने पेड़ थे । मेरे दादा
ने उन्हें लगाया था । पतझड़ के दिनों में मुझे एक ड्राम
(क़रीब- पौने दो माशे) रेशम के कीड़े के अंडे दिये गए
और मुझसे उन्हें सेने-पालने और बढ़ाने के लिए कहा गया ।
वे अंडे गहरे भूरे रंग के थे । छोटे इतने थे कि एक ड्राम में
मैंने कम-से-कम' ५८३५ अंडे गिने । नन्ही-से-नन्ही आल-
पीन के सिरे से भी वे छोटे थे । वे, बिलकुल निर्जीव थे ।
पर जब मलो तो वे कड़कड़ाते थे । वे अंडे मेरी मेज़ पर
इधर-उधर पड़े रहे । मैं उन्हें भूल-सा गया । एक दिन बसंत
ऋतु में मैं अपने बग़ीचे में गया, तो देखा कि शहतूत के
पेड़ों, पर कलियाँ फूल रही हैं । जो पेड़ धूप से सब झड़-
झुड़ गए थे, उनमें अब नई पतियाँ निकल आई हैं । यह देख
मुझे रेशम के कीड़ों के अंडों की याद आई । घर आकर मैंने
उन्हें ढूँढ़ा और उन्हें अलग-अलग करके एक बड़ी जगह
रक्खा । अधिकतर अंडे अब रंग में गहरे भूरे नहीं रहे


92 ad‌bhuta carcā
kuṁvara - maज़e se do-cāra dina jalse dekhege, nainītāla meṃ
yaha maज़e kahāṁ milate | vyāsajī, aba to yoṃ nahīṃ baiṭhā jātā |
dekhie āpake bhaṃḍāra meṃ kucha hai, do-cāra botala nikālie,
kucha raṃga jame |
8 - reśama ka kīड़e
mere baग़īce meṃ śahatūta ke kucha purāne peड़ the | mere dādā
ne unheṃ lagāyā thā | patajhaड़ ke dinoṃ meṃ mujhe eka ḍrāma
(क़rība- paune do māśe) reśama ke kīड़e ke aṃḍe diye gae
aura mujhase unheṃ sene-pālane aura baढ़āne ke lie kahā gayā |
ve aṃḍe gahare bhūre raṃga ke the | choṭe itane the ki eka ḍrāma meṃ
maiṃne kama-se-kama' 5835 aṃḍe gine | nanhī-se-nanhī āla-
pīna ke sire se bhī ve choṭe the | ve, bilakula nirjīva the |
para jaba malo to ve kaड़kaड़āte the | ve aṃḍe merī meज़ para
idhara-udhara paड़e rahe | maiṃ unheṃ bhūla-sā gayā | eka dina basaṃta
ṛtu meṃ maiṃ apane baग़īce meṃ gayā, to dekhā ki śahatūta ke
peड़oṃ, para kaliyāṁ phūla rahī haiṃ | jo peड़ dhūpa se saba jhaड़-
jhuड़ gae the, unameṃ aba naī patiyāṁ nikala āī haiṃ | yaha dekha
mujhe reśama ke kīड़oṃ ke aṃḍoṃ kī yāda āī | ghara ākara maiṃne
unheṃ ̣dhūṁढ़ā aura unheṃ alaga-alaga karake eka baड़ī jagaha
rakkhā | adhikatara aṃḍe aba raṃga meṃ gahare bhūre nahīṃ rahe


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